Na din acha hai, na hal acha hai
Kisi jogi ny kaha tha ke ye saal acha hai,
Mainy poocha wo kab chahega mujhe meri tarha
Bas muskura ke keh diya sawal acha hai ...
कलम पकड़ा ना सके हाथो मे...
...हथौड़ा थमा दिये
मासूम की एक छोटी गलती...
...और थप्पड़ जमा दिये
खिलौनो से खेलने वाला बचपना......खिलौना बनाने लगा....बस्ता ढ़ोने की उम्र मेँ चार पैसे भी कमाने लगा।मिल ना सकी 'छोटूवा' को पेन्सिल-स्लेट......बाप की दुकान पे माँजता कप-प्लेटचार पैसे हाथो मेँलाखो का बचपना लूट गया....
जवानी क्या ख़ाक सुधरेगीजब पौधा बचपन मेँ ही टूट गया।
By sunny Kumar tiwari..........